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मसीही और पवित्र स्थल: प्रारंभिक कलीसिया की परंपरा और आज के चर्च भवनों की ओर प्रवृत्ति

मसीही और पवित्र स्थल : प्रारंभिक कलीसिया की परंपरा और आज के चर्च भवनों की ओर प्रवृत्ति प्रस्तावना आज के मसीही समाज में चर्च भवनों को लेकर एक गहरी लालसा दिखाई देती है । एक भव्य इमारत , एक स्थायी स्थान , एक प्रतिष्ठित भवन — इन सबकी अभिलाषा इतनी प्रबल हो गई है कि कभी - कभी यह इस मूल प्रश्न से भटका देती है : क्या यह आरंभिक कलीसिया की आत्मा के अनुकूल है ? हारोल्ड डब्ल्यू . टर्नर की पुस्तक From Temple to Meeting House इस प्रश्न का गहन उत्तर देती है , जहाँ वे बताते हैं कि पूजा स्थलों का स्वरूप मसीही धर्मशास्त्र , सामाजिकता और मिशन की समझ को किस प्रकार दर्शाता है । मंदिर से सभा - गृह की यात्रा : एक धर्मवैज्ञानिक दृष्टिकोण टर्नर की मूल स्थापना यह है कि यहूदी मंदिर - प्रथा , जहाँ ईश्वर एक विशेष स्थान में ' स्थित ' माने जाते थे , वह मसीह के आगमन के साथ एक नवीन दृष्टिकोण में बदल गई । यरूशलेम का मंदिर अब ईश्वर की स्थायी उपस्थिति का केंद्र नहीं रहा । ...