त्रिएक (Trinity) के सिद्धांत का महत्व और विधर्म (Heresy) का उदय
त्रिएक ( Trinity) के सिद्धांत का महत्व और विधर्म ( Heresy) का उदय प्रस्तावना त्रिएक का सिद्धांत मसीही विश्वास और आराधना के केन्द्र में है । यह बताता है कि एक ही परमेश्वर है , जो अपने तत्व ( सुभाव / स्वरूप ) में एक है , परन्तु अनादि काल से तीन भिन्न किन्तु समान और अनन्त व्यक्तियों — पिता , पुत्र और पवित्र आत्मा — के रूप में विद्यमान है । यह सत्य कोई दार्शनिक कल्पना नहीं है , बल्कि यह पवित्रशास्त्र में क्रमिक और पवित्र आत्मा से प्रेरित प्रकाशन का परिणाम है , जिसका परिपूर्ण स्वरूप मसीह की सेवकाई और प्रेरितों की गवाही में प्रकट होता है । कलीसिया के इतिहास से यह सिद्ध होता है कि जब भी त्रिएक के सिद्धांत को गलत समझा गया , नज़रअंदाज़ किया गया या अस्वीकार किया गया , तो विधर्म उत्पन्न हुआ , जिसने सुसमाचार को विकृत किया और उद्धार को कमजोर किया । यह लेख त्रिएक के बाइबिलीय आधार , उसके धार्मिक महत्व , और इस सिद्धांत के छोड़े जाने पर उठे विधर्मों की जांच कर...